तंबाकू का पूर्ण इतिहास, नुकसान, हिंदी में 2021- Boitapic

नमस्कार दोस्तों हम आपका स्वागत करते हैं BoitaPic में आज हम आपको तंबाकू का इतिहास के बारे में बताएंगे कि तंबाकू कहां से आया किसने बनाया कैसे पूरी दुनिया में फैला और इसको खाने से कितनी हानियां हैं |

इसको क्यों नहीं खाना चाहिए और लोग क्यों खाते हैं इसको तो हम आपको इन सभी के बारे में आज बताएंगे ।दोस्तों आपको तो पता ही है |

आजकल हर गली हर लोखड हर शहर हर छोटे-मोटे शहर ऐसा दुनिया में कोई जगह नहीं है जहां पर गुटका ना दिखता हो तंबाकू ना दिखता हो |

जिसे लोग खाते ना हो दोस्तों तंबाकू गुटके से ही सीक्रेट बनता है जिसको मिलाकर और ऊपर से कागज दाल के सिगरेट बनाया जाता है जिसे जलाकर लोग नशा करते हैं । चलिए दोस्तों हम इसके बारे में सभी जानकारी आपको देने की कोशिश करते हैं ।

तंबाकू का पूर्ण इतिहास हिंदी में

तंबाकू का इतिहास
तंबाकू क्या है

दोस्तों तंबाकू एक ऐसा आदत और अभी हाल है जिसमें लोग तंबाकू को को चकत्ते भी हैं जीभ पर रख कर घंटों या मिनटों तक जी पर रहते हैं और दिनों दिन इसका आविष्कार होता रहा जिससे तंबाकू को मिलाकर और उसके ऊपर कागज से धक्के तंबाकू का अलग स्वाद लेने के लिए बनाया गया है जिसको जला कर लो उसके धोने को अपने अंदर ग्रहण करते हैं bजिससे उनको नशा आता है ।

तंबाकू का आविष्कार 5000 से 3000 ईसा पूर्व के प्रारंभिक काल में हुआ था । कई प्राचीन सभ्यताओं में इसको खुशबू सुगंध लाने के लिए जलाया जाता था यह तक किया जाता था जब कोई त्योहार होता था यह कोई खुशी की बात होती थी तो यह तभी जलाया जाता था जब दुर्गंध को हटाया जाए ।

और यह तंबाकू को कई सभ्यताओं और रीति-रिवाजों में कई धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान इसको खुशबू और सुगंध लाने के लिए जलाया जाता था | जिससे वातावरण में खुशबू फैला रहे दुर्गंध ना आए इसीलिए लोग इसको उस समय प्राचीन काल के समय इसको सिर्फ दुर्गंध को हटाने के लिए ही इस्तेमाल करते थे ।

इसके बाद लोग इसको आनंद लेने के लिए थोड़ा थोड़ा करके लेने लगे कोई इस दुआ को सांस के अंदर खींचता जिससे उसको आनंद आता कोई उसको हाथ से मसलकर जीभ के नीचे कुछ समय तक रखता जिससे उसको आनंद आता है |

ऐसे ही करके तंबाकू खुशबू फैलाते फैलाते मनुष्यों के अंदर प्रवेश करने लगा जिससे मनुष्य को आनंद की अनुभूति होने लगी जिससे उनको आदत पड़ गया और इसको एक हद तक इस्तेमाल करने से तंबाकू का लाभ ही मिलता है ।

लेकिन इसको ज्यादा इस्तेमाल करने से शरीर के कुछ अंग खराब हो जाते हैं और धीमे-धीमे बहुत ज्यादा समस्या आने से मनुष्य की मृत्यु भी हो जाती है और उसका सीधा कारण तंबाकू को ज्यादा इस्तेमाल करने से होता है ।

तंबाकू को पुरानी दुनिया में 15 100 के दशक के अंतिम दौर पर जाना गया था और इसको लोगों के बीच में प्रचलित जान आ गया जहां इसको कुछ व्यापारी दुनिया में फैला रहे थे |

क्योंकि उन व्यापारियों ने तंबाकू का आविष्कार किया था जिससे उनको लगा कि यह दुनिया में फैलाया जा सकता है बहुत से इस्तेमाल के लिए इसी कारण व्यापारी ने इसको लोगों के बीच में पहुंचाना सही समझा ।

इसको प्रचलित करने के बाद ही लोग इसको इस्तेमाल करने लगे कोई मंदिर में इस्तेमाल करने लगा दुर्गंध को हटाने के लिए तो कोई अपने घर में हर कोई किसी ना किसी कार्य में इसको इस्तेमाल करता रहा |

लेकिन धीमे-धीमे लोग इसको अपने इस्तेमाल के लिए भी अपने आनंद के लिए भी इस्तेमाल करने लगे जिसके कारण लोगों की मृत्यु होने लगी |

जिससे यह तंबाकू वह को लोग तंबाकू को बहिष्कृत करने लगे लेकिन फिर भी इसको लोग चोरी चोरी इस्तेमाल करते रहे हैं कुछ लोग इसको बहिष्कृत करते लेकिन कुछ लोग इसको चोरी-चोरी पिया करते हैं|

आज कोई और कई लोग इसको भगवानों के नाम पर पिया करते दहन किया करते हैं यह बोलकर कि भगवान विश को पीते हैं यह मेला के बहुत से लोगों की संख्या सम्मा को को गर्म करने में बढ़ गई | जिसके कारण समय के अनुसार बहुत से लोग मृत्यु को प्राप्त हुए ।लेकिन इसके बावजूद भी तंबाकू के पदार्थ लोकप्रिय हो गए ।

1920 के दौरान बहुत से लोग मृत्यु प्राप्त करने लगे तंबाकू के कारण तो कुछ जर्मन वैज्ञानिकों ने इस पर आविष्कार किया |

जिसके कारण उन्होंने समाज लोगो के सामने कुछ देर से सही लोगों के बीच में पहली बार बताया गया कि  तंबाकू धूम्रपान और फेफड़े के कैंसर के बीच के संबंधों के बारे में लोगों को जानकारी दी जिससे लोगों के बीच बहुत हंगामा हुआ |

उन्होंने तुरंत फैसला किया कि अब तंबाकू को जड़ से खत्म कर देंगे बहुत समय तक आंदोलन हंगामा लड़ाई हुआ जिससे कुछ समय तक तंबाकू बंद भी रहा है लेकिन कुछ लोग इसको चोरी चोरी खाते थे उनको इससे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि इससे लोग मर भी रहे हैं उनको सिर्फ तंबाकू से आनंद लेने से मतलब था ।

जब वैज्ञानिकों ने लोगों को धूम्रपान की असलियत बताइए जिससे लोग क्यों मर रहे हैं धूम्रपान के कारण तो इतिहास में पहली बार धूम्रपान विरोधी अभियान की शुरुआत किया गया ।

आंदोलन पूरे जर्मन में फैल गया जिससे लोग इसको बंद करने लगे लेकिन यहां आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुश्मनों की सीमा में पहुंचने में नाकाम रहा और और जल्द ही यह पूरे दुनिया में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हो गया क्योंकि लोगों को इसकी नुकसान के बारे में पता ही नहीं था तभी लोग धीमे-धीमे और बहुत से लोग इसको ग्रहण करने लगे ।

फिर कुछ समय पश्चात 1950 के दौरान बहुत अच्छे स्वास्थ्य अधिकारियों ने फिर से तूफान और कैंसर के बीच के संबंधों पर चर्चा शुरू किया । बहुत से समय रिसर्च करने के बाद वैज्ञानिकों को 1980 के दशक में कुछ से बहुत ज्यादा तंबाकू से कैंसर होने की प्रमाण प्राप्त हुए । जिसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया और हर देश की सरकार ने इसको गंभीरता से देखा और कार्रवाई पर जोर दिया ।

इसके वजह से विकसित देशों में तो तंबाकू ओं की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट आई जिससे देशों में तंबाकू मिलना बहुत मुश्किल हो गया था विकसित देशों में जिसके कारण वहां के जो तूफान करते थे उनको तूफान मिलना बहुत ही मुश्किल हो गया था जिससे तूफान में बहुत ज्यादा गिरावट आई ।

हालांकि पूरे विकासशील दुनिया में तंबाकू की बढ़त जारी अभी तक है। इसको उस समय ब्लैक में भी चोरी चोरी लगों तक पहुंचाया जाता था जिससे वह बहुत से पैसे लेते थे जिससे लोग बहुत अमीर भी हुए ब्लैक में तंबाकू बेचने के वजह से जो स्वाद में सरकार को पता चला तो सरकार ने इसको लागू कर दिया ।

इस शर्त पर कि तंबाकू के ऊपर चेतावनी लिखा होगा जिससे लोग वह को पता चले इसको खाने से क्या हो सकता है इसको खाने से लोगों को यह पता चले कि इसको खाने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है यह सोच कर इसको लागू किया कि सरकार ने किस को देखकर बहुत से लोग इसका सेवन नहीं करेंगे ।

इसके बाद हर बड़े बड़े शहर और देशों में इसके फैक्ट्री खुलने लगे जिसमें बड़ी मात्रा में तंबाकू को बनाने का काम चलने लगा और बड़े-बड़े शहरों छोटे-छोटे गांव में इसको पहुंचाने लगे जिससे बहुत से मात्रा में लोग इसको खरीदने लगे ।

तंबाकू के चेतावनी लिखने के बावजूद भी बहुत सी मात्रा में लोग इसका सेवन करने लगे क्योंकि उनको आनंद आने लगा और इसका सबसे बड़ा कारण है कि उनको आनंद आते-आते उनको इस चीज की लत भी लग गई जो लोग दिन में सिर्फ एक बार तंबाकू का सेवन करते थे |

वह दिन में हर घंटे हर समय तंबाकू का सेवन करने लगे जिससे उनकी आयु बहुत कम हो गए और कुछ समय बाद तेजी से लोग फिर मृत्यु को प्राप्त होने लगे इस बार सबसे ज्यादा संख्या थी पहले से इससे सरकारों ने बीच में इस पर प्रतिबंध भी लगा दिया था |

लेकिन लोग इसको ब्लैक से बेचने लगे इसकी प्राइस और बढ़ गई और अभी भी इसको ब्लैक से बेच रहे हैं कुछ देशों में फिर इसके बाद इसका एक सलूशन निकाला गया इसको दो मात्रा में विभाजित किया गया एक तंबाकू के मात्रा में और एक पान मसाला के मात्रा में जिससे लोग आनंद के लिए खा सके |

पान मसाला मैं खुशबू रहती है जो मुंह को फेस करके रखती है जिससे मुंह से दुर्गंध ना आए इसी कारण लोग इसका सेवन करने लगे जो तंबाकू का सेवन करते थे |

वह सिर्फ इसका सेवन करने लगे लेकिन इसके साथ साथ तंबाकू भी बनाया गया जो पान मसाला के साथ ही खाया जा सकता था |

जिसको पान मसाला पसंद था उसे पान मसाला ही खाता था और जो नशे के लती थे जिनको नशा करना पसंद था वह पान मसाला के साथ तंबाकू भी लिया करते हैं और उसका सेवन भरपूर मात्रा में करते हैं ।

जिससे सरकार को पता चला कि हम कितना भी इसको बहन कर दे बंद कर दे आंदोलन करे लेकिन लोग नहीं सुधरेंगे जब तक लोग नहीं सुधरेंगे हम इसको बंद नहीं कर सकते लोग अपने मृत्यु के जिम्मेदार स्वयं हैं|

इसीलिए सरकार ने इस पर विचार करना छोड़ दिया फिर भी सरकार इस पर रोक लगाती रहे फिर भी लोग नहीं माने लोग चोरी चोरी इसको खरीदते रहे और सेवन करते रहे सरकार कितना भी प्रयास करते रहे कि लोगों की जान ना जाए |

लेकिन लोग ही नहीं करते लोग सेवन करते ही रहते हैं चोरी से और कितना भी पैसे लगे फिर भी तंबाकू का सेवन करते ही रहते हैं । वैज्ञानिकों के अनुसार तंबाकू का चलन करीब 3000 से 5000 ई. पू. के आसपास हुआ था ।

तंबाकू का उत्पादन कैसे होता है 

तंबाकू के सेवन का सबसे आमतौर और सबसे आसान तरीका धूम्रपान है लोग इसको बहुत बड़ी मात्रा में जो धूम्रपान लिया करते हैं और तंबाकू धूम्रपान किया जाने वाला सबसे आम पदार्थ है जिसके बिना धूम्रपान किया नहीं जा सकता ।

तंबाकू का उत्पादन कृषि उत्पाद मैं अक्सर दूसरे योगज के साथ मिलाकर और फिर सुलगाया जाता है। इसके बाद तंबाकू बनता है इसके परिणाम स्वरूप आपको सांस के जरिए अंदर खींचा जाता है फिर सक्रिय पदार्थ तंबाकू को फेफड़ों के माध्यम से कोशिकाओं से अवशोषित कर लिया जाता है ।

तंबाकू का सेवन करते हैं तंत्रिका अंत में रासायनिक प्रतिक्रियाओं को शुरू करती है जिससे हृदय गति स्मृति और प्रतिक्रिया की अवधि बढ़ जाती है । इसके बाद  डोपामाइन और बाद में एंडोर्फिन का पर प्रभाव  होता है जो अक्षर नशे से जुड़े हुए होते हैं । जिसके बाद लोगों को आनंद की अनुभूति होती है ।

बहुत से लोग सीक्रेट और तंबाकू का सेवन इसलिए करते हैं जी जब उनको तनाव होता है जिससे तंबाकू पीने से उनका तनाव दूर हो जाता है | इसीलिए बहुत से लोग धूम्रपान और तंबाकू का सेवन करते हैं जिससे उनका तनाव काम और खत्म हो जाए |

जिनसे उनको तनाव महसूस ही ना हो इसीलिए बहुत से लोग इसको इस्तेमाल करते हैं और इस्तेमाल करते करते उनको लत लग जाती है इस चीज की जिससे वह अपना बहुत ज्यादा ही नुकसान कर बैठते हैं ।

पूरी दुनिया में 31 मई का दिन हर साल विश्व तंबाकू निषेध दिवस के तौर पर बनाया जाता है। इसके बावजूद भी दुनिया तंबाकू को छोड़ नहीं रहे और इन बातों का कोई उन पर असर नहीं पड़ रहा जो कि दुनिया वाले को लत लग गई है तंबाकू की तंबाकू धीमे-धीमे शहर शहर देश विदेश में बहुत से वर्ग को प्रभावित कर रही है ।

दोस्तों आपको बता दें कि तंबाकू के धुएं में 4000 किस्म के रसायन होते हैं जिससे 60 कैंसर रोग उत्पन्न होते हैं जिसके कारण बहुत से मनुष्य अपने समय से पहले ही अकाल मृत्यु प्राप्त करते हैं |

यह सब जान के भी लोग तंबाकू को बंद नहीं करते क्योंकि उनको लत लग जाते हैं अगर जिसको लत लग जाते हैं वह तंबाकू का सेवन नहीं करते हैं तो उनको बेचैनी लगने लगती है ।

इस कारण कई शहर देशों में विदेशों में तंबाकू मुक्ति केंद्र भी बनाया गया है जिसमें ऐसे लोगों को भर्ती किया जाता है जिनको तंबाकू की लत है और वह छोड़ना चाहते हैं तो उनको उस में एडमिशन लेना पड़ता है फिर डॉक्टर के ट्रीटमेंट से उसका लत छूट जाता है ।

तंबाकू में मौजूद निकोटीन नशे का आदि बना देता तूफान करने से उसका धुआं 7 सेकंड के अंदर मस्तिष्क में पहुंचाता है और फेफड़ों और धमनियों में खुल जाता है जिससे मनुष्य को बहुत सी बीमारियां आ जाती है जिससे वह समय से पहले ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।

भारत देश में धूम्रपान की शुरुआत कब से हुई ।

भारत में अकबर बादशाह से पूर्व तंबाकू के प्रयोग की कोई जानकारी इतिहास में लिखी नहीं है का इतिहास जानकारों के अनुसार कहा जाता है कि जब अकबर के दरबार में   नामक पुर्तगाली आया था तो पुरुष कालीन ने अकबर को तंबाकू और बहुत सुंदर बड़ी सी जड़ाऊ चिलम भेंट की थी |

अकबर बादशाह को चिलम बहुत पसंद आई और उसने चिलम पीने की तालीम भी उसी पुर्तगाली से लिया था अकबर बादशाह को धूम्रपान करते देख कर उसके दरबारियों को बहुत ही आश्चर्यजनक लगा ।

अकबर बादशाह को धूम्रपान करते हुए देखकर दरबारियों का मन भी धूम्रपान करने का इच्छुक हुआ । इस प्रकार भारत देश में सन 1609 के आसपास धूम्रपान की शुरुआत हुई । कुछ जानकारों के अनुसार तंबाकू को सबसे पहले अकबर बादशाह का एक उच्च अधिकारी बीजापुर से लाया था ।

उसके बाद उसे सौगात के तौर पर बादशाह को भेज दिया गया था इसके बाद भारत के लोगों ने तंबाकू को चिलम में रखकर पीना शुरु किया था ।

भारत में मुगल काल में हुक्के की शुरुआत कब हुई थी ।

अलग-अलग जानकारों से अलग-अलग कहानियां बन के आती है कि हुक्के की शुरुआत कब की थी भारत में और कुछ जानकारी के अनुसार यह पता चला है कि भारत में होके की शुरुआत मुगल काल के दौरान हुई थी |

15वीं सदी में बादशाह अकबर के शासनकाल में अब्दुल नामक एक कारीगर ने हुक्के का आविष्कार किया था
उस कारीगर का कहना था कि पानी के माध्यम से होने वाली धूम्रपान से सेहत का कोई भी नुकसान नहीं होता है। जबकि जानकारों के अनुसार तथ्य एकदम गलत साबित हुआ है

भारत में कितने लोग नशे का सेवन करते हैं

भारत में लगभग 7.3 करोड़ लोग नशे का सेवन करते हैं । और दिनोंदिन लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है ।

बीड़ी और सिगरेट कहां से आए हैं

भारत में अमेरिका इंग्लैंड से बीड़ी सिगरेट आए थे वैसे तंबाकू बीड़ी सिगरेट आदि विदेशी संस्कृति का हिस्सा था प्रारंभ में अमेरिका में लोगों ने तंबाकू को पत्ते में लपेटकर बीड़ी के रूप में पिया और इंग्लैंड के लोगों ने तंबाकू को कागज में लपेट कर सिगरेट के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा था ।

धूम्रपान करने पर कौन कौन से देश में सजा दिया जाने लगा था 

जलपान करने पर भारत और तुर्की में सजा दिया जाने लगा था । जानकारों के अनुसार भारत में जहांगीर बादशाह ने तंबाकू का प्रयोग करने वालों लोगों के लिए एक सजा निर्धारित की थी । इसके बाद धूम्रपान करने वाले आदमी का मुंह काला करके गधे पर बैठाकर पूरे नगर में घुमाया जाने लगा था ।

तुर्की देश में जो लोग धूम्रपान करते थे उनके होंठ काट दिए जाते थे जो तंबाकू सुनते थे उनकी नाक काट दी जाती थी ।

तंबाकू कितने प्रकार के होते हैं ?

तंबाकू करेने के कई प्रकार हैं जिनमे से यह सभी मुख्य हैं जिनको देश में बहुत ही ज्यादा खोजा जाता हैं  – भांग तंबाकू पियो महादेव जी, मिराज तंबाकू, नो तंबाकू डे, गाय छाप तंबाकू, शिखर तंबाकू, दिलबाघ तंबाकू, राजश्री तंबाकू, इत्यादि  हैं |

 

धन्यवाद् सभी को

दोस्तों आज हमने आपको तंबाकू खाने से क्या होता है, तंबाकू छोड़ने के उपाय, तंबाकू का इतिहास, तंबाकू करने से कोनसी बिमारिय होती हैं , तंबाकू का पूर्ण इतिहाश, तंबाकू खाने के फायदे, तंबाकू का भाव, तंबाकू खाने के नुकसान, तंबाकू छोड़ने की मेडिसिन, तंबाकू सेवन के दुष्परिणाम इन्सभी की जानकारी दिए हैं  | अगर दोस्तों हमसे कुझ जानकारी रह कई हैं तो हमें सन्देश दे तंबाकू की यह जानकारी रह गई हैं |

आपको धन्यवाद हमारे जानकारी को पढ़ने के लिए |आपका दिन सुभ रहे |

 

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